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16 महाजनपद और उनकी राजधानी

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“16 महाजनपद और उनकी राजधानी” 1500 ई०पू० से 600 ई०पू० का काल वैदिक काल वैदिक सभ्यता से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर कहलाता है जिसमें वेदों की रचना हुई। आर्य आए थे मध्य एशिया से। उसके बाद आता है महाजनपद काल 600 ई०पू० से 322 ई०पू० का काल। देखिए महाजनपद काल तक आते-आते लोहे का प्रयोग है वह ज्यादा होने लगा था। तो जो योद्धा है उसके लिए भी काम आसान हुआ और इसके साथ ही जो किसान वर्ग हैं उनके लिए भी खेती करना आसान हो गया।

लोहे का प्रयोग होने के कारण कुछ छोटे-छोटे जनपदों को मिलाकर के महाजनपद बने। यह 16 महाजनपद थे। और एक प्रकार से यह समझ लीजिए जैसे मेवाड़ राजवंश था, मारवाड़ के शासक थे, आमेर के शासक थे, मालवा के शासक थे उसी प्रकार से ये साम्राज्य थे जिनमें एक राजा होता था, शासक होता था। उसकी राजधानी होती थी और उनकी प्रजा होती थी। इसे दूसरी नगरीय क्रांति भी कहा जाता है। पहली नगरीय सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता थी। 16 महाजनपदों का उल्लेख हमें बौद्ध ग्रंथ के ‘अंगुत्तर निकाय’ तथा जैन ग्रंथ के ‘भगवती सूत्र’ में मिलता है।

16 महाजनपद और उनकी राजधानी
16 महाजनपद

सबसे ज्यादा महाजनपद उत्तर प्रदेश और बिहार वाला क्षेत्र में था। क्योंकि सबसे ज्यादा जो लोहा खोजा गया वो यहीं था। मगध महाजनपद इन 16 महाजनपदों में सबसे मजबूत और शक्तिशाली महाजनपद था। गन्धार और कम्बोज दो ऐसे महाजनपद हैं जो वर्तमान पाकिस्तान में हैं अब ये भारत में नहीं हैं। इसके अतिरिक्त दक्षिण की तरफ देखें तो केवल एक महाजनपद है अश्मक जो गोदावरी नदी के तट पर स्थित था।

उज्जैन और महिष्मति अवन्ति राज्य की राजधानी थी। उत्तरी अवन्ति की जो राजधानी थी वह थी उज्जैन और दक्षिणी अवन्ति की राजधानी थी महिष्मति। उत्तर प्रदेश का पूर्वी भाग तथा बिहार का पश्चिमी भाग सबसे ज्यादा लोहा इसी जगह खोजा गया।

वज्जि और मल्ल ये दो महाजनपद गणराज्य थे। गणराज्य का मतलब होता है जहाँ का जो राजा है वंशानुगत नहीं होता था। यानी जनता उसका चुनाव करती थी।

सोलह महाजनपद और उनकी राजधानी तथा वर्तमान क्षेत्र

1. अंग –

उतरी बिहार का आधुनिक मुंगेर तथा भागलपुर जिला इसके अंतर्गत आता था, इसकी राजधानी थी चम्पा। चम्पा का प्राचीन नाम मालिनी था। यहां का राजा ब्रह्मदत्त था, बाद में बिम्बिसार ने अंग को जीतकर मगध साम्राज्य का हिस्सा बना लिया।

2. मगध –

यह वर्तमान पटना और गया का क्षेत्र था। इसकी राजधानी गिरिब्रज/राजगृह थी। यह सोलह महाजनपदों में सर्वधिक शक्तिशाली साम्राज्य था। इसके बारे में हमलोग नीचे विस्तार से पढ़ेंगे।

3. काशी –

आधुनिक बनारस और उसके आसपास के क्षेत्रों को काशी महाजनपद कहा गया। इस महाजनपद की राजधानी वाराणसी थी। वाराणसी वरुणा एवं असी नदियों के मध्य स्थित है इसलिए इसका नाम वाराणसी पड़ा है। काशी को अजातशत्रु के शासनकाल में मगध में मिला लिया गया।

4. कोशल –

इसकी राजधानी श्रावस्ती/अयोध्या थी। कोशल को भी मगध साम्राज्यवाद का शिकार बनना पड़ा। अजातशत्रु ने अपने पराक्रम से कोशल को भी मगध में मिला लिया।

5. वज्जि –

वज्जि आठ जनों का संघ था। इनमें विदेह, लिच्छवि, कत्रिक एवं वृज्जि महत्वपूर्ण थे। इसकी राजधानी विदेह एवं मिथिला थी। लिच्छवियों की राजधानी वैशाली थी, जो अपने समय का महत्वपूर्ण नगर था। अजातशत्रु ने वज्जि को जीतकर मगध साम्राज्य का अंग बना लिया।

6. मल्ल –

आधुनिक देवरिया एवं गोरखपुर क्षेत्र में स्थित मल्ल दो भागों में बंटा था, जिसमें एक की राजधानी कुशावती अथवा कुशीनगर एवं दूसरी की राजधानी पावापुरी थी। कुशीनारा में महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण (मृत्यु) एवं पावापुरी में महावीर को निर्वाण (मृत्यु) प्राप्त हुआ। मल्लराजा सृस्तिपाल के राजप्रासाद में महावीर स्वामी को निर्वाण प्राप्त हुआ था।

7. चेदि –

इसकी राजधानी शक्तिमती थी।। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के अंदर जो बुंदेलखंड वाला स्थान है वहां पर थी यह चेदि महाजनपद।

8. वत्स –

यमुना के किनारे स्थित वत्स महाजनपद आज का इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के आस-पास का क्षेत्र था। इसकी राजधानी कौशाम्बी थी

9. कुरु –

आज का दिल्ली, मेरठ और हरियाणा के कुछ क्षेत्र उस समय का कुरु महाजनपद था। इसकी राजधनी इंद्रप्रस्थ थी जिसका उल्लेख महाभारत में मिलता है।

10. पांचाल –

यह वर्तमान बरेली, बदायूँ, फर्रूखाबाद (उत्तर प्रदेश) का क्षेत्र था। गंगा नदी इस महाजनपद को दो भागों – उत्तरी पांचाल तथा दक्षिणी पांचाल में बांटती है। उतरी पांचाल की राजधानी अहिच्छत्र तथा दक्षिणी पांचाल की राजधानी कांपिल्य थी। कान्यकुब्ज का प्रसिद्ध नगर इसी राज्य में स्थित था। द्रौपदी इसी राज्य की कन्या थी।

11. मत्स्य –

अभी का जो जयपुर (राजस्थान) के आस-पास का क्षेत्र है वो सभी मत्स्य महाजनपद के अंतर्गत आते थे। इसकी राजधानी विराटनगर थी। और देखियेगा जो महाभारत काल में पांडवों को बारह वर्ष का वनवास तथा एक वर्ष का अज्ञातवास जो मिला है तो अपना एक वर्ष का अज्ञातवास पांडवों ने इसी विराटनगर में गुजारा था।

12. शूरसेन –

शूरसेन महाजनपद का विस्तार आधुनिक मथुरा के आस-पास थी। इसकी राजधानी मथुरा थी।

13. अश्मक –

इसकी राजधानी थी पोतन/पोटली। यह अश्मक वही है जो दक्षिण में गोदावरी नदी के तट पर बसा एकमात्र महाजनपद था।

14. अवन्ति –

यह वर्तमान मालवा (मध्य प्रदेश) का क्षेत्र था। यह महाजनपद दो भागों- उतरी अवन्ति एवं दक्षिणी अवन्ति में विभाजित था। उत्तरी अवन्ति की राजधानी उज्जैन तथा दक्षिणी अवन्ति की राजधानी महिष्मति थी।

15. कम्बोज –

यह वर्तमान में पाकिस्तान का हजारा जिला वाला क्षेत्र था। इसकी राजधानी थी हाटक

16. गन्धार –

यह वर्तमान में पाकिस्तान के रावलपिंडी और पेशावर के क्षेत्र थे। इसकी राजधानी तक्षशिला थी। तक्षशिला जो है ये विश्वविद्यालय भी था।

तो ये थे 16 महाजनपद और उनके बारे में कुछ महत्वपूर्ण पॉइंट्स। अगला पोस्ट में हमलोग मगध साम्राज्य का उत्कर्ष (उदय) के बारे में पढ़ेंगे और देखेंगे कि आखिर कैसे इन सोलह महाजनपदों में मगध सर्वाधिक शक्तिशाली एव मजबूत साम्राज्य बन कर उभरा। साथ ही महाजनपद काल एवं मगध साम्राज्य से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर को भी देखेंगे जो कि क्विज टाइप से होगा। अगर यह पोस्ट आपको पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें और कोई सुझाव हो तो कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं।

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